"मां भारती की सुरक्षा अर्थव्यिवस्थाय के साथ-साथ अपनी आध्याैत्मिक और सांस्कृदतिक विरासत से भी आपका जुड़ाव और मजबूत होइसके लिए प्रवासी तीर्थ दर्शन योजना की भी शुरूआत की जा रही है।" PM at 15th PBD Convention-2019
ये देश में हो रहे बड़े पैमाने पर हो रहे परिवर्तन की न्यूग इंडिया के नए आत्म्विश्वाास की एक झांकी भर है। भारत के गौरवशाली अतीत को फिर स्थापपित करने के लिए 130 करोड़ भारतवासियों के संकल्प का ये परिणाम है। और मैं आज बहुत गर्व से कहना चाहता हूं इस संकल्प में आप भी शामिल हैं। "

'हमने बदलाव

करके

दिखाया है'


PM: पासपोर्ट के साथ-साथ वीजा से जुड़े नियमों को भी सरल किया जा रहा है

"हमने टेक्नोंलॉजी का इस्तेेमाल करके इस 85 प्रतिशत की लूट को शत-प्रतिशत खत्म कर दिया है। बीते साढ़े चार वर्षों में करीब-करीब 5 लाख 80 हजार करोड़ रुपये... यानि करीब-करीब 80 billion डॉलर हमारी सरकार ने अलग-अलग योजनाओं के तहत सीधे लोगों को दिए, उनके बैंक अकाउंट में ट्रांसफर किए हैं। किसी को घर के लिए, किसी को पढ़ाई के लिए, किसी को scholarship के लिए, किसी को गैस सिलेंडर के लिए, किसी को अनाज के लिए ये राशि दी गई है।"

मॉरिशस के प्रधानमंत्री your excellency, प्रवीन्द जगन्नातथ जी, उनकी पत्नीे श्रीमती कविता जगन्नाiथ जी, यूपी के राज्यैपाल श्रीमान राम नाईक जी, केंद्रीय मंत्रिपरिषद के मेरे सहयोगी सुषमा स्वाराज जी, मुख्यीमंत्री श्री योगी आदित्यरनाथ जी, हरियाणा के मुख्यूमंत्री श्री मनोहर लाल जी, उत्राैं् खंड के मुख्यषमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत जी, मंत्रिपरिषद के मेरे सहयोगी और दुनिया भर से पधारे, और काशी प्रधारे मेरे प्रिय भाईयों और बहनों।

सबसे पहले आप सभी का बहुत-बहुत अभिनंदन, बहुत-बहुत स्वाउगत है। आप सभी यहां अपनी, अपने पूर्वजों की मिट्टी की महक से खींचे चले आए हैं। कल जिन्हेंत प्रवासी भारतीय सम्मा न मिलने वाला है। उन्हेंी मैं अपनी तरफ से अग्रिम शुभकामनाएं देता हूं। आज का दिन मेरे लिए भी विशेष है। जैसा कि सुषमा जी कह रही थी, मैं आपके सामने प्रधानमंत्री के साथ-साथ काशी का सांसद होने के नाते एक मेज़बान के रूप में उपस्थित हुआ। बाबा विश्वहनाथ और मां गंगा का आशीर्वाद आप सभी पर बना रहा मेरी यही प्रार्थना है।

साथियों, आज आपसे अपनी बात शुरू करने से पहले मैं डॉक्टर श्री श्री श्री शिवकुमार स्वाथमी जी के निधन पर अपना शोक व्यuक्त करना चाहता हूं। तुमकुर के श्री सिद्ध गंगा मठ में मुझे कई बार उनसे आशीर्वाद लेने का अवसर मिला था। और जब भी उनसे मिलता था वो एक बेटे की तरह मुझे इतना स्ने्ह करते थे, इतना आशीर्वाद देते थे। ऐसे महान संत महाऋषि का जाना हम सभी के लिए बहुत दु:खद है, मानव कल्यामण के लिए उनके योगदान को देश हमेशा याद रखेगा। मैं आदरपूर्वक उन्हेंख नमन करता हूं। उनको श्रद्धांजलि देता हूं।

भाईयों और बहनों, दुनियाभर में बसे आप सभी भारतीयों से संवाद का यह अभियान हम सभी के प्रिय श्रद्धेय अटल बिहार वाजपेयी जी ने शुरू किया था। अटल जी के जाने के बाद यह पहला प्रवासी भारतीय सम्मेपलन है। इस अवसर पर मैं अटल जी को श्रद्धासुमन अर्पित करता हूं, उनकी इस विराट सोच के लिए नमन करता हूं।

साथियों, आप सभी काशी में है और इसलिए मैं काशी और आप सभी में एक समानता भी देख रहा हूं। बनारस नगरी चिरकाल से ही भारत की सांस्कृवतिक, अध्यारत्मिक और ज्ञान की परंपरा से दुनिया में देश का परिचय कराती रही है। आप भी अपने दिलों में भारत और भारतीयता को संजोये हुए इस धरती की ऊर्जा उससे दुनिया को परिचित करा रहे हैं। साथियों, मैं आपको भारत का Brand Ambassador मानने के साथ ही भारत के सामर्थ्य और भारत की क्षमताओं, देश की विशेषताओं का प्रतिनिधि भी और प्रतीक भी मानता हूं। इसलिए ही आप अभी जिस देश में भी रह रहे हैं, वहां के समाज को भी आपने अपनापन दिया है। वहां की संस्कृंति और अर्थव्य।वस्थात को समृद्ध किया है। आपने 'वसुधैव कुटुम्बकम' इस भारतीय दर्शन का हमारे पारिवारिक मूल्योंत का विस्तानर किया है। आप सभी जिस देश में बसे हैंवहां के समाज के लगभग हर क्षेत्र में leadership के रोल में नजर आते हैं, मॉरिशस को श्री प्रवीण जगन्नांथ जी पूरे समर्पण के साथ आगे बढ़ा रहे हैं इसके अलावा पुर्तगाल, त्रिनाड, टोबेगो और आयरलैंड जैसे अनेक देशों को ऐसे सक्षम लोगों का नेतृत्व मिला है। जिनकी जड़े भारत में हैं।

साथियों, आप सभी के सहयोगसे बीते साढ़े चार वर्षों में भारत ने दुनिया में अपना स्वा भाविक स्थापन पाने की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाया है। पहले लोग कहते थे कि भारत बदल नहीं सकता। हमने इस सोच को ही बदल डाला है। हमने बदलाव करके दिखाया है।

साथियों, दुनिया आज हमारी बात को, हमारे सुझावों को पूरी गंभीरता के साथ सुन भी रही है और समझ भी रही है। पर्यावरण की सुरक्षा और विश्व की प्रगति में भारत के योगदान को दुनिया स्वीहकार कर रही है। संयुक्त राष्ट्री के सबसे बड़े पर्यावरण पुरस्का।र Champions of the earth के साथ-साथ Seoul Peace Prize का मिलना इसी का परिणाम है।

साथियों, आज भारत अनेक मामलों में दुनिया की अगुवाई करने की स्थिति में है। International solar alliance यानि ISA ऐसा ही एक मंच है। इसके माध्यम से हम दुनिया को one world, one sun , one grid उस तरफ ले जाना चा‍हते हैं। ये हमारे उस लक्ष्य का भी हिस्साा है जिसके तहत हम भारत की समस्यारओं के ऐसे समाधान तैयार कर रहे हैं जिससे दूसरे देशों की मुश्किले भी हल हो सके।local solution global application के approach के साथ हम काम कर रहे हैं। Reform, perform, transform और सबका साथ-सबका विकास के सूत्र पर चलते हुए देश ने बीते साढ़े चार वर्षों में क्याक पाया इसकी एक तस्वीहर मैं आपके सामने रखना चाहता हूं।

आज भारत दुनिया की तेजी से बढ़ती economic ताकत है। तो sports में भी हम बड़ी शक्ति बनने की तरफ निकल पड़े हैं। आज Infrastructure के बड़े और आधुनिक संसाधन बन रहे हैं तो space के क्षेत्र में भी रिकॉर्ड बना रहे हैं।

मॉरिशस के प्रधानमंत्री your excellency, प्रवीन्द जगन्नातथ जी, उनकी पत्नीे श्रीमती कविता जगन्नाiथ जी, यूपी के राज्यैपाल श्रीमान राम नाईक जी, केंद्रीय मंत्रिपरिषद के मेरे सहयोगी सुषमा स्वाराज जी, मुख्यीमंत्री श्री योगी आदित्यरनाथ जी, हरियाणा के मुख्यूमंत्री श्री मनोहर लाल जी, उत्राैं् खंड के मुख्यषमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत जी, मंत्रिपरिषद के मेरे सहयोगी और दुनिया भर से पधारे, और काशी प्रधारे मेरे प्रिय भाईयों और बहनों।

सबसे पहले आप सभी का बहुत-बहुत अभिनंदन, बहुत-बहुत स्वाउगत है। आप सभी यहां अपनी, अपने पूर्वजों की मिट्टी की महक से खींचे चले आए हैं। कल जिन्हेंत प्रवासी भारतीय सम्मा न मिलने वाला है। उन्हेंी मैं अपनी तरफ से अग्रिम शुभकामनाएं देता हूं। आज का दिन मेरे लिए भी विशेष है। जैसा कि सुषमा जी कह रही थी, मैं आपके सामने प्रधानमंत्री के साथ-साथ काशी का सांसद होने के नाते एक मेज़बान के रूप में उपस्थित हुआ। बाबा विश्वहनाथ और मां गंगा का आशीर्वाद आप सभी पर बना रहा मेरी यही प्रार्थना है।

साथियों, आज आपसे अपनी बात शुरू करने से पहले मैं डॉक्टर श्री श्री श्री शिवकुमार स्वाथमी जी के निधन पर अपना शोक व्यuक्त करना चाहता हूं। तुमकुर के श्री सिद्ध गंगा मठ में मुझे कई बार उनसे आशीर्वाद लेने का अवसर मिला था। और जब भी उनसे मिलता था वो एक बेटे की तरह मुझे इतना स्ने्ह करते थे, इतना आशीर्वाद देते थे। ऐसे महान संत महाऋषि का जाना हम सभी के लिए बहुत दु:खद है, मानव कल्यामण के लिए उनके योगदान को देश हमेशा याद रखेगा। मैं आदरपूर्वक उन्हेंख नमन करता हूं। उनको श्रद्धांजलि देता हूं।

भाईयों और बहनों, दुनियाभर में बसे आप सभी भारतीयों से संवाद का यह अभियान हम सभी के प्रिय श्रद्धेय अटल बिहार वाजपेयी जी ने शुरू किया था। अटल जी के जाने के बाद यह पहला प्रवासी भारतीय सम्मेपलन है। इस अवसर पर मैं अटल जी को श्रद्धासुमन अर्पित करता हूं, उनकी इस विराट सोच के लिए नमन करता हूं।

साथियों, आप सभी काशी में है और इसलिए मैं काशी और आप सभी में एक समानता भी देख रहा हूं। बनारस नगरी चिरकाल से ही भारत की सांस्कृवतिक, अध्यारत्मिक और ज्ञान की परंपरा से दुनिया में देश का परिचय कराती रही है। आप भी अपने दिलों में भारत और भारतीयता को संजोये हुए इस धरती की ऊर्जा उससे दुनिया को परिचित करा रहे हैं। साथियों, मैं आपको भारत का Brand Ambassador मानने के साथ ही भारत के सामर्थ्य और भारत की क्षमताओं, देश की विशेषताओं का प्रतिनिधि भी और प्रतीक भी मानता हूं। इसलिए ही आप अभी जिस देश में भी रह रहे हैं, वहां के समाज को भी आपने अपनापन दिया है। वहां की संस्कृंति और अर्थव्य।वस्थात को समृद्ध किया है। आपने 'वसुधैव कुटुम्बकम' इस भारतीय दर्शन का हमारे पारिवारिक मूल्योंत का विस्तानर किया है। आप सभी जिस देश में बसे हैंवहां के समाज के लगभग हर क्षेत्र में leadership के रोल में नजर आते हैं, मॉरिशस को श्री प्रवीण जगन्नांथ जी पूरे समर्पण के साथ आगे बढ़ा रहे हैं इसके अलावा पुर्तगाल, त्रिनाड, टोबेगो और आयरलैंड जैसे अनेक देशों को ऐसे सक्षम लोगों का नेतृत्व मिला है। जिनकी जड़े भारत में हैं।

साथियों, आप सभी के सहयोगसे बीते साढ़े चार वर्षों में भारत ने दुनिया में अपना स्वा भाविक स्थापन पाने की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाया है। पहले लोग कहते थे कि भारत बदल नहीं सकता। हमने इस सोच को ही बदल डाला है। हमने बदलाव करके दिखाया है।

साथियों, दुनिया आज हमारी बात को, हमारे सुझावों को पूरी गंभीरता के साथ सुन भी रही है और समझ भी रही है। पर्यावरण की सुरक्षा और विश्व की प्रगति में भारत के योगदान को दुनिया स्वीहकार कर रही है। संयुक्त राष्ट्री के सबसे बड़े पर्यावरण पुरस्का।र Champions of the earth के साथ-साथ Seoul Peace Prize का मिलना इसी का परिणाम है।

साथियों, आज भारत अनेक मामलों में दुनिया की अगुवाई करने की स्थिति में है। International solar alliance यानि ISA ऐसा ही एक मंच है। इसके माध्यम से हम दुनिया को one world, one sun , one grid उस तरफ ले जाना चा‍हते हैं। ये हमारे उस लक्ष्य का भी हिस्साा है जिसके तहत हम भारत की समस्यारओं के ऐसे समाधान तैयार कर रहे हैं जिससे दूसरे देशों की मुश्किले भी हल हो सके।local solution global application के approach के साथ हम काम कर रहे हैं। Reform, perform, transform और सबका साथ-सबका विकास के सूत्र पर चलते हुए देश ने बीते साढ़े चार वर्षों में क्याक पाया इसकी एक तस्वीहर मैं आपके सामने रखना चाहता हूं।

आज भारत दुनिया की तेजी से बढ़ती economic ताकत है। तो sports में भी हम बड़ी शक्ति बनने की तरफ निकल पड़े हैं। आज Infrastructure के बड़े और आधुनिक संसाधन बन रहे हैं तो space के क्षेत्र में भी रिकॉर्ड बना रहे हैं।

"बीते साढ़े चार वर्षों में भारत ने दुनिया में अपना स्वा भाविक स्थाकन पाने की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाया है"

आज हम दुनिया का सबसे बड़ा strat-up eco system है तो दुनिया की सबसे बड़ी Health care scheme आयुषमान भारत भी चला रहे हैं। आज हमारा युवा make in India के तहत रिकॉर्ड स्तर पर मोबाइल फोन, कार, बस, ट्रक, ट्रेन बना रहा है तो वही खेत में रिकॉर्ड अन्न उत्पाुदन हो रहा है। आपको मैं एक उदाहरण देता हूं।

साथियों, आप में से अनेक लोगों ने हमारे देश के एक पूर्व प्रधानमंत्री की भ्रष्टाcचार को लेकर कही एक बात जरूर सुनी होगी। उन्होंवने कहा था कि केंद्र सरकार दिल्लीा से जो पैसे भेजती है उसका सिर्फ 15 प्रतिशत ही लोगों तक पहुंच पाता है। अगर दिल्लीर से एक रुपया निकलता है तो 15 पैसा गांव में पहुंचता है, 85 पैसे छूमंतर हो जाते हें। ये एक भूतपूर्व प्रधानमंत्री ने हमारे देश में कहा था।इतने वर्ष तक देश में जिस पार्टी ने शासन किया, उसने देश को जो व्यीवस्थाव दी थी उस सच्चारई को प्रधानमंत्री रहते हुए उन्होंंने स्वीपकार किया था। लेकिन अफसोस ये रहा कि बाद के अपने 10-15 साल के शासन में भी इस लूट को, इस लीकेज को बंद करने का प्रयास नहीं किया गया। बीमारी तो पता चला, बीमारी को स्वीलकार भी किया लेकिन इलाज करने की दिशा में ने सोचा, न कुछ किया। देश का मध्यम वर्ग ईमानदारी से टैक्स देता रहा है और 85 प्रतिशत की ये लूट भी चलती रही है।

साथियों, अब मैं आपको आज की सच्चाफई भी बताना चाहता हूं। हमने टेक्नोललॉजी का इस्ते माल करके इस 85 प्रतिशत की लूट को शत-प्रतिशत खत्म कर दिया है। बीते साढ़े चार वर्षों में करीब-करीब 5 लाख 80 हजार करोड़ रुपये... यानि करीब-करीब 80 billion डॉलर हमारी सरकार ने अलग-अलग योजनाओं के तहत सीधे लोगों को दिए, उनके बैंक अकाउंट में ट्रांसफर किए हैं। किसी को घर के लिए, किसी को पढ़ाई के लिए, किसी को scholarship के लिए, किसी को गैस सिलेंडर के लिए, किसी को अनाज के लिए ये राशि दी गई है। अब आप अंदाज लगाइए अगर देश अपने पुराने तौर-तरीकों से ही चलता रहता होता तो आज भी इस 5 लाख 80 हजार करोड़ रुपये में से करीब-करीब साढ़े चार लाख से भी ज्या दा हजार करोड़... साढ़े चार लाख हजार करोड़ से ज्या दा... ये रकम छूमंतर हो जाती, लीक होती, अगर हम व्यरवस्थाय में बदलाव नहीं लाते होते तो ये राशि उसी तरह लूट ली जाती जैसे पूर्व प्रधानमंत्री ने स्वीपकार किया था कि लूटी जाती थी।

साथियों, ये सुधार पहले भी हो सकता था लेकिन नीयत नहीं थी, इच्छाेशक्ति नहीं थी और नीति की अपेक्षा करना जरा कठिन लगता है। हमारी सरकार अब उस रास्तेय पर चल रही है कि सरकार द्वारा दी जाने वाली हर मदद Direct benefit transfer scheme के तहत सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में transfer की जाए।मैं आपको एक और आंकड़ा देता हूं। पिछले साढ़े चारसाल में हमारी सरकार ने करीब-करीब 7 करोड़ ऐसे फर्जी लोगों को पहचान कर उन्हेंं व्यीवस्थात से हटाया है। ये 7 करोड़ लोग वो थे जो कभी जन्मेा ही नहीं थे जो वास्तव में थे ही नहीं लेकिन ये 7 करोड़ लोग सरकारी सुविधाओं को लाभ ले रहे थे। कागज पर वो थे, कागज पर पैदा भी हुए,बड़े भी हुए और फायदा भी उठाते रहे।आप सोचिए पूरे ब्रिटेन में जितने लोग हैं, पूरे फ्रांस में जितने लोग हैं, पूरे इटली में जितने लोग हैं ऐसे अनेक देशों की जनसंख्याय से ज्या दा तो हमारे यहां वो लोग थे जो सिर्फ कागजों में ही जी रहे थे और कागजों में ही सरकारी सुविधाओं का लाभ चला जाता था। इन 7 करोड़ फर्जी लोगों को हटाने का काम हमारी सरकार ने किया है। ये उस बदलाव की एक झलक है जो पिछले साढ़े चार वर्षों में देश में आना शुरू हुआ है।

साथियों, ये देश में हो रहे बड़े पैमाने पर हो रहे परिवर्तन की न्यू इंडिया के नए आत्म विश्वातस की एक झांकी भर है। भारत के गौरवशाली अतीत को फिर स्थारपित करने के लिए 130 करोड़ भारतवासियों के संकल्प का ये परिणाम है। और मैं आज बहुत गर्व से कहना चाहता हूं इस संकल्प में आप भी शामिल हैं।

साथियों, सरकार का पूरा प्रयास है कि आप सभी जहां भी रहें सुखी रहें और सुरक्षित रहें। बीते साढ़े चार वर्षों के दौरान संकट में फसे 2 लाख से ज्या दा भारतीयों को सरकार के प्रयासों से दुनिया के भिन्न-भिन्न देशों में मदद पहुंचाई गई है। आपकी सोशल सिक्योकरिटी के साथ-साथ पासपोर्ट, वीजा, पीआईओ और ओसीआई कार्ड को लेकर भी तमाम प्रक्रियाओं को आसान करने की कोशिश सरकार कर रही है। प्रवासी भारतीयों के लिए कुछ महीने पहले ही एक नया कदम भी उठाया गया है। दुनिया भर में हमारी एम्बेोसिस और कांउसलेटस को पासपोर्ट सेवा प्रोजेक्ट से जोड़ा जा रहा है। इससे आप सभी के लिए पासपोर्ट सेवा से जुड़ा एक centralize system तैयार हो जाएगा। बल्कि अब तो एक कदम आगे बढ़ते हुएchip based E-passport जारी करने की दिशा में भी काम चल रहा है।

साथियों, पासपोर्ट के साथ-साथ वीजा से जुड़े नियमों को भी सरल किया जा रहा है। ई-वीजा की सुविधा मिलने से आपके समय की बचत भी हो रही है और परेशानियांभी कम हुई हैं। अभी भी कोई समस्यार इसमें है तो उसके सुधार के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं।आप में से अनेक इस बात से भी परिचित होंगे कि हमारी सरकार ने पीआईओ कार्ड को ओसीआई कार्ड में बदलने की प्रक्रिया को भी आसान बनाया है। साथियों आप अपनी मिट्टी से भले ही दूर है, लेकिन New India के निर्माण में आपकी सक्रिय भागीदारी में.. और बढ़ोतरी होइसके लिए लगातार प्रयास चल रहे हैं। भारत में जो बदलाव आ रहा है, जो नये अवसर बन रहे हैं, उसमें आपका योगदान बहुत ज्या दा महत्वयपूर्ण है। बदलते हुए इस भारत में आप Research and Development और innovation में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। सरकार यह भी कोशिश कर रही है कि भारत के स्टाहर्ट अप और NRI mentors को एक साथ एक प्लेऔटफॉर्म पर लाएं। Defense Manufacturing भी आपके लिए एक अहम सेक्टर हो सकता है।

भाईयों और बहनों मां भारती की सुरक्षा अर्थव्येवस्थाथ के साथ-साथ अपनी आध्याेत्मिक और सांस्कृेतिक विरासत से भी आपका जुड़ाव और मजबूत होइसके लिए प्रवासी तीर्थ दर्शन योजना की भी शुरूआत की जा रही है। मैं इस मंच पर पहले भी कह चुका हूं, और आज फिर दोहराना चाहता हूं कि आप जिस भी देश में रहते हैं वहां से अपने आसपास के कम से कम पांच परिवार और वो भी non-Indian पांच परिवारों को भारत आने के लिए आप प्रेरित करिये। आपका यह प्रयास देश में टूरिज्म बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा। इसी तरह आप इस वर्ष गांधी जी की 150वीं जन्म जयंती पर अपने देश में रहते हुए कैसे उनकी बातों को, भारत की बातों को अन्य लोगों तक पहुंचाएंगे। इस पर भी विचार कीजिए। पिछले दिनों सुषमा जी के नेतृत्व में दुनिया के कई देशों में एक अच्छाि प्रयोग हुआ। वहां की हमारी सभी embassiesने गांधी 150 जयंती पर उस देश के कलाकारों को 'वैष्णव जन तो तेने कहिये'गांधी जी का प्रिय भजन उनको गाने के लिए request की। you tube पर इसकी सारी video available है। आप भी हैरान हो जाएंगे कि विदेश के नागरिक, विदेश के कलाकार कितनी भक्तिभाव से 'वैष्णव जन तो तेने कहिये'यह गा रहे हैं। एक प्रकार से गांधी ग्लोlबल है, यह अनुभूति हम सब इसको सुनते कर सकते हैं। और इसलिए कुछ विशेष कार्यक्रम अगर आप करना चाहे तो भारतीय दूतावास embassy द्वारा भी आपकी हर संभव मदद की जाएगी। इस वर्ष हम सभी गुरूनानक देव जी की 550वीं जयंती भी मना रहे हैं। गुरुवाणी को हम कैसे दूसरे देशों के लोगों तक पहुंचाए, उन्हेंग भारत की समृद्ध सांस्कृीतिक विरासत से उसे कैसे परिचित कराए, इस बारे में भी मैं चाहूंगा कि आप जिस भी देश में हो, कुछ न कुछ योजनाएं बननी चाहिए, कुछ न कुछ प्रयास होना चाहिए। साथियों, यह बातें सिर्फ सुझाव के तौर पर आपके सामने रख रहा हूं। मुझे पता है कि आप में से बहुत से लोग पहले से ऐसा करते आ रहे हैं, लेकिन आपसे स्नेहह ऐसा है कि मैं खुद को रोक नहीं पाता हूं।

मैं विशेष रूप से आज उत्तर प्रदेश सरकार को भी बधाई देना चाहता हूं आमतौर पर किसी राज्य में प्रवासी भारतीय दिवस का इतना बड़ा कार्यक्रम लेना हो, दुनिया के इतने मेहमान आने वाले हो, तो उस राज्य को बहुत मेहनत करनी पड़ती है, बहुत योजना करनी पड़ती है। करीब-करीब एक साल उसमें लग जाता है। और एक कार्यक्रम करने के बाद एक साल थकान उतरने में चला जाता है। मैं उत्तर प्रदेश को इसलिए बधाई देता हूं कि कुंभ जितना बड़ा कार्यक्रम चल रहा हो, इतनी बड़ी व्यरवस्थाग लगी हुई हो, कुंभ मेले की तैयारी में 2-3 साल लगातार काम करना पड़ता है। और मुझे संकोच हो रहा था कि कुंभ के मेले की जिम्मेनदारी उत्तर प्रदेश के पास है, सारी सरकारी मशीनें उसमें व्येस्त हैं। 10 करोड़ लोग वहां आने की संभावना है। ऐसे में काशी में यह कार्यक्रम करें या न करें। मेरे मन में झिझक थी लेकिन मैं योगी जी को, उनकी पूरी टीम को, उत्तर प्रदेश के प्रशासन और शासन को हृदय से बधाई देता हूं कि उन्होंने एक साथ दो इतने बड़े कार्यक्रम इस बात ने दुनिया को इस बात का परिचय करा दिया है कि उत्तर प्रदेश की Government, उत्तर प्रदेश की bureaucracy, उत्तर प्रदेश के मुलाजिम यह भी दुनिया में किसी से कम नहीं है। और इसलिए मैं उनका विशेष अभिनन्दन करता हूं।

मैं काशीवासियों को सिर झुका करके प्रणाम करना चाहता हूं, क्योंcकि मैंने प्रवासी भारतीय दिवस को गुजरात में भी किया हुआ है। और शायद गुजरात के मुख्यैमंत्री कहो या आज प्रधानमंत्री के पद पर देखो, शायद हिन्दुरस्तामन में एक ऐसा इंसान हूं जो करीब-करीब सभी प्रवासी भारतीय दिवस के कार्यक्रम में उपस्थित रहा हूं। जब मुख्यामंत्री थातब भी आता था, प्रधानमंत्री के बाद तो दायित्व बना है। एक बार सिर्फ मैंने वीडियो कॉन्फ्रें स से शरीक हुआ था, otherwise मैं physically ही जाता हूं। मैंने इतने कार्यक्रम देखे हैं। गुजरात में भी मैं मेज़बान था, लेकिन काशी ने जिस प्रकार से इस कार्यक्रम को सरकारी कार्यक्रम नहीं बनने दिया, जनता जनार्दन का कार्यक्रम बन गया, हर काशीवासी ने इसे अपना कार्यक्रम बना लिया। करीब-करीब चार सौ लोग परिवारों में ठहरे हैं और यहां की tent city का नजारा ऐसा है कि मुझे बताया गया कि कई लोग जो होटल में ठहरे थे, वो होटल छोड़ करके tent city का मजा लेने चले आए हैं। एक नया अनुभव करने के लिए चले आए। मैं समझता हूं और पिछले दो महीने से मैं लगातार देख रहा था। काशीवासियों ने काशी को एक प्रकार से ग्लोमबल Headquarter बना दिया हो ऐसा माहौल बना दिया था। यहां आया हुआ हर मेहमान काशीवासी को लग रहा है उसके खुद के परिवार का मेहमान है। ऐसा वातावरण प्रवासी भारतीय सम्मेैलनों में इसके पहले मैं कभी देख नहीं पाया हूं, जो काशीवासियों ने दिखाया है। और इसलिए मैं काशीवासियों को विशेष रूप से प्रणाम करता हूं। मैं स्थालनीय administration को भी, यहां के अधिकारियों को भी हृदय से बहुत-बहुत बधाई देता हूं कि उन्हों्ने अपने बलबूते पर इतनी बड़ी व्यलवस्थार को चलाया, बढ़ाया और आगे बढ़ाया। और इन सबके पीछे सुषमा जी का नेतृत्व और उनकी पूरी टीम यह तो अभिनंदन के हकदार है ही है। काशी का गौरव बढ़ा तो यहां के सांसद के नाते मेरी खुशी जरा चार गुना ज्यासदा बढ़ जाती है।

मेहनत आप लोगों ने की, योजना आप लोगों ने बनाई, पसीना आपने बहाया, दिनरात बिना सोये, बिना थके आप लोग चलते रहे, लेकिन लोग पीठ मेरी थपथपा रहे हैं। यह आपका प्याेर है, आपकी मेहनत है, जिसके कारण यह संभव हुआ है और इसलिए काशी की सांसद के नाते मेरी इस कर्मभूमि के नाते मैं आज एक विशेष संतोष की अनुभूति करता हूं और मुझे विश्वाशस है कि मेरी काशी आपके माध्यम से फिर एक बार दुनिया के हर व्येक्ति के दिल में जगह बनाएगी और हर किसी को काशी आने का मन करे । मैं अंत में फिर से एक बार आप सभी का काशी में पधारने के लिए हृदय से बहुत-बहुत आभार व्यिक्त करता हूं। भारत में आपका यह प्रवास सुखद रहे, इसी कामना के साथ बहुत-बहुत धन्य वाद करता हूं, मैं व्यीक्तिगत रूप से प्रधानमंत्री के रूप में नहीं, सांसद के रूप में नहीं, व्याक्तिगत अपने आनंद के लिए पिछले एक-दो साल से कार्यक्रम कर रहा हूं। भारत में मार्च महीना एक प्रकार से exam का महीना होता है और 10वीं, 12वीं की परीक्षा यानि परिवार में सालभर एक तनाव का माहौल होता है। हर किसी को लगता है बच्चेा को 10वीं में ज्या‍दा Marks मिले, 12वीं में ज्याऔदा Marks मिले, एक तनाव का माहौल होता है। तो मैं हमेशा कोशिश कर रहा हूं कि exam के पहले सभी बच्चोंं से, उनके parents से, उनके Guardian से, उनके अभिभावकों से, उनके teacher से मैं संवाद करूं और परीक्षा को बड़ा संकट न माने लोग इसके लिए जो भी बातें समझा सकता हूं मैं समझाऊं। मुझे खुशी है इस 29 जनवरी को मैं देशभर के और इस बार तो विदेश के लोग भी जुड़ रहे हैं। उनके बच्चेो भी, उनके family के लोग भी नरेंद्र मोदी App के माध्यम से, video के माध्यम से जुड़ने वाले हैं। करोड़ों-करोड़ों परिवारों के साथ exam warriorsके संबंध में मैं संवाद करने वाला हूं। बच्चोंन से बातचीत करने वाला हूं और परीक्षा का तनाव बच्चोंa का न रहे इसके लिए जो भी तौर-तरीके बता सकता हूं, मैं बताने वाला हूं, 29 जनवरी, 11 बजे, मुझे विश्वातस है कि आप भी अपने परिवार के लोगों को सूचना करेंगे कि वहां आपके परिवार के लोग भी अगर इस exam के इस कालखंड में हो तो वे भी उसका फायदा उठा सकते हैं।

मैं फिर एक बार इस भव्य योजना के लिए और हमारे मित्र प्रवीन्द जगन्नागथ जी का परिवार के साथ यहां आना, समय देना, इसका कार्यक्रम की शोभा बढ़ाना मैं इसके लिए उनका बहुत हृदय से आभार व्य्क्त करता हूं। उनके पिता जी ने मॉरिशस को बनाने में बहुत बड़ी भूमिका अदा की है। एक प्रकार से आधुनिक मॉरिशस के वो architecture हैं। उनका भी उतना ही प्या‍र हम सब बना हुआ है। पिछले दिनों उनके पिता जी विशेष रूप से परिवार के साथ काशी की यात्रा के लिए आए थे, आज प्रवीन्दtजी का आना हो गया, परिवार के साथ कविता जी को ले करके आए गए। मैं मानता हूं उनका भारत के प्रति जो आपार स्ने ह हैं। वो दिनों-दिन बढ़ता चला जा रहा है। उन्हों्ने समय दिया, शोभा बढ़ाई, उनका भी आभार व्य।क्त करता हूं। मैं फिर एक बार आप सब को अनेक-अनेक शुभकामनाओं के साथ बहुत-बहुत धन्यावाद।